Saturday, May 14, 2016

एक रात की बात

एक अजीब सी दास्तां है ये 
ये किसका आसमान है ये 
टिम-टिमाते हैं तारे यहाँ 
चाँद क्यों परेशान है ये 
ढूंढ़ता है कोई खुद को कहीं 
दुनिया उसकी कभी थी ही नहीं
अरमानों के पुल जलाके
शायद बचे निशान कहीं
रात का समुन्दर ले आता है
जाने कैसे-कैसे याद कई
तैर चलो तुम बादलों पर
मिल जाए शायद वो फिर वहीँ
गूंजता सा है कुछ पहाड़ों में
उसकी आवाज़ फिर है नयी
भूलता भी तो कैसे मैं
थामा था उसने यहीं !

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