उन आँखों में थे शायद ख्वाब मेरे
सवाल थे उसके, थे जवाब मेरे
होठों से लिपट रहा था जो लाल रंग
सिमट गए उन में सब शाम-सवेरे
पहन लूँ कभी उन बालों का आँचल
झुमकों ने है ये मुझसे कहा
गले का धागा बाँध रहा है
जन्मों के रिश्ते तेरे-मेरे
जाने कहाँ छिपा है वो तिल
मिट जाते हैं जिस से अँधेरे
जंचते तो हैं वो हर रंग में
हर रंग की किस्मत बदल गयी
देखता रहता हूँ उनको घंटों
हर लम्हे की बात बदल गयी!