Sunday, November 27, 2016

वो आँखें

उन आँखों में थे शायद ख्वाब मेरे 
सवाल थे उसके, थे जवाब मेरे
होठों से लिपट रहा था जो लाल रंग
सिमट गए उन में सब शाम-सवेरे 
पहन लूँ कभी उन बालों का आँचल 
झुमकों ने है ये  मुझसे कहा 
गले का धागा बाँध रहा है 
जन्मों के रिश्ते तेरे-मेरे
जाने कहाँ छिपा है वो तिल
मिट जाते हैं जिस से अँधेरे 
जंचते तो हैं वो हर रंग में 
हर रंग की किस्मत बदल गयी 
देखता रहता हूँ  उनको घंटों 

हर लम्हे की बात बदल गयी!

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